आरती 2019-11-26T03:36:24+00:00

आरती श्री मोहन बाबा

जगमग-जगमग जोत जगी है। मोहन आरती होने लगी है॥
कलयुग में अवतार लियो है। पर्वत ऊपर वास किये है॥
गांव मिलकपुर मंदिर तेरा, जहाँ दुखियो का लग रहा डेरा॥
ज्ञान यहाँ भंडार भरा है, सीता फल का वृक्ष खड़ा है॥
उस मोहन की जोत जगी है। जगमग……….
पर्वत खोली का सिंहासन, जिसपर मोहन लाते आसान॥
आ मंदिर देते भाषण, सब जीवों को देते राशन॥
घोड़े वाले तेरी जोत जगी है। जगमग………
यहाँ पर दिल तुम राखो सच्चा। सभी है इसमें बूढा बच्चा॥
प्रेम से मिलकर शक्कर बांटो। बाबाजी का जोहड़ छाँटो॥
खोली वाले तेरी जो जगी है। जगमग………
अन्धान को तुम नेत्र देते। कोढ़िन को तुम देते काया॥
बांझन को तुम पुत्र देते। निर्धन को देते हो माया॥
गुफा वाले तेरी जोत जगी है। जगमग………
दीना नाथ हो अन्तर्यामी। सच्चे भक्तो के हो स्वामी॥
भूत प्रेत को तुरंत हटाते। नीले घोड़े रास रचाते॥
गुरु नेतराम ने तुम को ध्याया। सब भक्तो को गुरु बनाया॥
धूना धारी तेरी जोत जगी है। जगमग……….
शीला जी को तुम दर्शाये गांव मिलकपुर मंदिर बनवाये॥
शिव भोले का वास कराये। अपनी माया को दर्शाये॥
लटा धारी तेरी जोत जगी है। जगमग……….
हमारे गुरु की यही है विनती। प्रेम से मिलकर बोलो आरती॥
सारी दुनिया शीश झुकाती। आ खोली में दर्शन पाती॥
गूलर वाले तेरी जोत जगी है। जगमग……….