बाबा मोहन राम चालीसा

गौरीनंदन गणराज का मैं प्रथम सुमरु नाम

श्रीगुरु चरण रज मस्तक वर लिखूं महिमा मोहनराम

करैं दंडवत नमन तुम्हे श्री खोली के महाराज

शरण पडें हम श्याम आपकी पूर्ण कीजे काज

पूर्ण कीजे काज नित्य मुनि रटें आपकी माला

कृपा सिंधु भव सिंधु जग बंधू दीन दयाला ।।

 

 

।। चौपाई ।।

 

जय जय मोहन राम कन्हाई

आनंद कन्द तेरी कला सवाई ।।

बाल सिद्ध योगी ब्रह्मचारी

शक्तिवान महा तपधारी ।।

दुख भंजन सच्चे सुखदाता

भक्त जनों के भाग्य विधाता ।।

जब-जब दुख में तुम्हे पुकारा

आके तुमने दिया सहारा ।।

संत रूप कृष्ण अवतारी

दीन दयाला मोहन मुरारी ।।

खोली में अवतार लियो है

नन्दू जी को दर्श दियो है ।।

रूप सरूप अनूपनीरला

कानन कुण्डल गाल में माला ।।

भूरी लटा माथ पै सोहें

मुख मंडल छवि मन को मोहे ।।

लीला घोडा वाहन प्यारा

धन्य आपका खोली द्वारा ।।

गांव मिलकपुर रोशन किया

सच्चा ज्ञान जगत को दिया ।।

पर्वत ऊपर भवन विराजै

लाल ध्वजा आकाशी साजै ।।

माया अपरम पार तुम्हारी

भोले भाले सुख भण्डारी ।।

अन्धो को तुम नेत्र देते

पल भर में दुःख पीड़ा हर लेते ।।

निर्धन को देते धन माया

करो रोगियों की शुद्ध काया ।।

बल बुद्धि के देने वाले

चमत्कार हैं बड़े निराले ।।

आके दर पै ज्योत जगावै

गोदी पुत्र बाँझ खिलावै ।।

पूजा शुभ दिन दोज सुहानी

पूजै संत मुनि ब्रह्मज्ञानी ।।

निशचय कर जो तुमको ध्यावै

भय चिंता नहीं शोक सतावै ।।

नया जोहड़ गूलर की छाया

जहाँ पै तूने अद्धभुत रास रचाया ।।

सच्चों को भव तरन वाले

असुरों को संहारन वाले ।।

राम श्याम जैसे गुण पाए

जब हरी मोहन राम कहाये ।।

पंछी तक जयकारा बोलैं

कानों में अमृत रस घोलै ।।

मोहन नाम जपैं सन्यासी

राम नाम सर्व प्रकाशी ।।

मोहन नाम भय मेटन हारा

राम नाम का सकल पसारा ।।

मोहन नाम ब्रह्माण्ड समाया

राम नाम सब खेल रचाया ।।

राम नाम वेदों ने गाया

सब सन्तन को ज्ञान बताया ।।

मोहन नाम सुर नर मुनि गावै

राम नाम का ध्यान लगावै ।।

मोहन नाम को अगम बतावै

राम नाम का अन्त पावै ।।

मोहन नाम सबका हितकारी

राम नाम शुभ मंगल कारी ।।

मोहन नाम हे पर उपकारी

राम नाम माया विस्तारी ।।

सद्बुद्धि सद्भाव जगाओ

दुष्कर्मो से हमें बचाओ ।।

भक्ति का मार्ग अपनायें

कर शुभ कर्म सदा सुख पायें ।।

योगी राज यही अभिलाषा

करो नाथ ह्रदय में बासा ।।

शत  शत बार नमन है तुमको

दान दया का देना हमको ।।

तेरी भभूति मस्तक ल्यावैं

चरणों  में हम शीश झुकावै ।।

कृपा दृष्टि  करना बाबा

दुःख भय चिंता हारना बाबा ।।

नित्य  नैम चालीसा गावै

खुश हो मनवांछित फल पावै ।।

आवै सुख संपत्ति घर में

जिनका ध्यान मोहन हरि हर में ।।

‘रामेशवर’ भिक्षुक अज्ञानी

प्रेम दान देना महादानी ।।

देते रहो दास को दर्शन

जिससे रहै आत्मा प्रसन्न ।।

 

।। दोहा ।।

 

प्रेम से जो भी ये चालीसा पढ़े सुने नर नार

कहै रामेशवर प्रसन्न हों श्री खोली के अवतार

दुःख भय चिंता रोग दूर हों खुशियाँ मिलैं अपार

मिलकर बोलो सभी मोहन बाबा की जय जय कार ।।